पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां – पार्ट – 8

हेलो दोस्तो मे गौरव कुमार हाज़िर हू स्टोरी का अगला पार्ट लेके। पिछ्ले पार्ट मे आपने पढ़ा के केसे लाला बनवारी लाल पूरी रात सरबी जट्टी की चुदायी करता है और सुबह होते उसे जाने देता है। तो चलीये कहानी आगे बढाते है।

रितु ओर सरबी लाला की दुकान से रितु के घर आ हई थी। घर आकर रितु मे रसोई मे स्टोव पर चाय बननी रख दी और सरबी के पास आ गयी। “तो केसी रही जट्टी की रात लाला के साथ” रितु मे सरबी से पुछा। सरबी मे रितु की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली “तुमे तो जेसे पता ही नही”। “अरे मुझे केसे पता, मे तो दुसरे कमरे मे थी, बता ना, अब क़्यो शर्मा रही है” रितु सरबी को बोली। “तुझे केसे नही पता, सांड के साथ मुझे फसा दिया ओर खुद आराम से सो गयी” सरबी मुस्कुरते हुये बोली। “क़्यो मजा नही अया क्या” रितु ने पुछा। “नही मजा तो बहूत आया” सरबी सर झुकाते हुए बोली। “अये हये जट्टी कित्नी लाली आ गयी तेरे मुंह पर ये बात करते हुए, वेसे केसा लगा तुझे लाला का लंड, मस्त है ना एकदम” रितु ने सरबी के बेठ्ते हुए बोला। “बहुत मस्त है रितु, सच मे यार जब लाला ने लंड डाला ना तो बहुत मजा अया यार, अब तक हल्का ह्ल्का दरद हो रहा है” सरबी रितु को बोली। रितु तब रसोई मे जा चुकी थी और व्हा से 2कप चाय ले आयी। “लेकिन तू तो डर रही थी ना, लगता है लाला के लंड ने सारा डर दूर कर दिया” रितु सरबी को बोली। इस से पहले के सरबी कुछ बोलती सुखा मे रितु के दरवाजे से अवाज लगायी, “सरबी “। “ले आ गया तेरा खसम” रितु ने सरबी को देख्ते हुए बोला। “ये तो अब नाम का है, खसम तो अब लाला जी है” सरबी रितु को बोली और दोनो हंस पड़ी। सरबी ने चाय खतम की और चली गयी। दरवाजे पर सुखा खडा था, “कया है, आ जाती ना मै और 5-10मिन्त तक” सरबी सुखा को देख कर बोली। “अरे मेने अज काम पर थोड़ा जल्दी जाना है तो इसलिये तुमे अवाज दी” सुखा बोला। “अभी थोड़े ना चले जाओगे काम पर” सरबी को सुखा को बोलती हुई घर मे चली गयी।
सुखा भी सरबी के पीछे पीछे घर आ गया।
“सरबी खाना बना दे मेरा मुझे काम पर जाना है जल्दी अज” सुखा सरबी को बोला।
“हा बनाती हू ना, रुक जा अब थोड़ा टाईम” सरबी बोली और खाना बनाने लग गयी।
सरबी ने सुखा के लिये खाना बनाया और टिफ़िन मे डाल सुखा को दिया। सुखा ने खाना पकडा ओर काम पर चला गया। सरबी कमरे आकर बैड पर लेट गयी।
रात भर लाला से हुई चुदायी के बाद अब सरबी का जिस्म थका हुआ था लेकिन सरबी के चेहरे पर हल्की सी खुशी थी क्योंके सरबी जो कल तक एक कली थी उसे लाला ने अज फूल बना दिया था। एकाएक सरबी उठी और नहाने के लिये चली गयी। सरबी ने थोडा सा गर्म पानी लिया ओर उसमे ठंडा पानी मिला उसे ह्ल्का गर्म सा कर लिया।
सरबी ने अप्ने कपडे उतारे और खूँटे पर टांग दिये। सरबी को अपने जिस्म को निहार रही थी। उसके हाथ अपने मुम्मो पर थे जिन्हे कल रात लाला ने जी भर चूसा था। सरबी का हाथ चुत पर चला गया और जब उस्ने अपनी चुत को देखा तो उस पर हल्का खून लगा हुआ था जो लाला की मर्दानगी बयां कर रहा था। सरबी नहाने लगी और अपने जिस्म के एक एक अंग अंग को अहिस्ता से साफ किये जा रही थी। वह अप्नी चुत पर पानी डालने लगी और इस को हाथ से श्लाने लगी। सरबी को लाला का मूसल जेसा लंड याद आ रहा था जो कल रात उसकी चुत मे फुकार रहा था। सरबी ने नहकर अप्ने जिस्म को तौलिये से पोन्छा और अपने कपडे पहन बैड पर आक्र लेट गयी। सरबी को पता ही नही चला के कब उसकी आंख लग गयी और वह सो गयी।

Comments

Published by